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January 2nd, 2022 Blog

गुरुवार का व्रत

गुरुवार (बृहस्पतिवार)का व्रत बड़ा ही फलदायी माना जाता है। गुरुवार के दिन श्री हरि विष्णुजी की पूजा का विधान है। कई लोग बृहस्पतिदेव और केले के पेड़ की भी पूजा करते हैं। बृहस्पतिदेव को बुद्धि का कारक माना जाता है। केले के पेड़ को हिन्दू धर्मानुसार बेहद पवित्र माना जाता है।  बृहस्पतिवार के दिन भगवान विष्णु की पूजा होती है। गुरुवार को व्रत-उपवास करके यह कथा पढ़ने से बृहस्पति देवता प्रसन्न होते हैं। अनुराधा नक्षत्र युक्त गुरुवार से व्रत आरंभ करके 7 गुरुवार उपवास करने से बृहस्पति ग्रह की हर पीड़ा से मुक्ति मिलती है। गुरुवार का व्रत पूरे श्रद्धाभाव से करने पर व्यक्ति को गुरु ग्रह का दोष खत्म हो जाता है तथा गुरु कृपा प्राप्त होती है। इन दिन व्रत करने से व्यक्ति को सारे सुखों की प्राप्ति होती है।

कैसे करें बृहस्पतिवार व्रत पूजन:

  • अग्नि पुराण के अनुसार गुरुवार का व्रत अनुराधा नक्षत्र युक्त गुरुवार से आरंभ करके लगातार 7 गुरुवार करना चाहिए।
  • इस दिन प्रात: उठकर भगवान विष्णु का ध्यान कर व्रत का संकल्प लेना चाहिए।
  • बहस्पतिदेव का ध्यान करना चाहिए।
  • इस दिन पीले वस्त्रों, पीले फलों का प्रयोग करना चाहिए।
  • इसके बाद फल, फूल, पीले वस्त्रों से भगवान बृहस्पति देव और विष्णुजी की पूजा करनी चाहिए।
  • पूजा के बाद कथा सुननी चाहिए।
  • प्रसाद के रूप में केले चढ़ाना शुभ माना जाता है लेकिन इन केलों को दान में ही दे देना चाहिए।
  • शाम के समय बृहस्पतिवार की कथा सुननी चाहिए और मान्यतानुसार इस दिन एक बार बिना नमक का पीला भोजन करना चाहिए।

कितने गुरुवार रखें व्रत? 

16 गुरुवार तक लगातार व्रत करने चाहिए और 17वें गुरुवार को उद्यापन करना चाहिए. पुरुष यह व्रत लगातार 16 गुरुवार कर सकते हैं परन्तु महिलाओं या लड़कियों को यह व्रत तभी करना चाहिए जब वो पूजा कर सकती हैं, मुश्किल दिनों में यह व्रत नही करना चाहिए.

कब से करें शुरू? 

पूष या पौष के महीने को छोड़कर आप कभी भी ये व्रत शुरू कर सकते हैं. पौष का महीना अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार दिसम्बर या जनवरी में आता है. बाकी इस व्रत को किसी भी माह के शुक्लपक्ष के पहले गुरुवार से शुरू कर सकते हैं. किसी भी कार्य को शुरू करने के लिए शुक्ल पक्ष काफी शुभ माना जाता है.

कथा का लाभ  

यह व्रत अत्यंत फलदायी है. गुरुवार को व्रत-उपवास करके यह कथा पढ़ने से बृहस्पति देवता प्रसन्न होते हैं. अनुराधा नक्षत्र युक्त गुरुवार से व्रत आरंभ करके 7 गुरुवार उपवास करने से बृहस्पति ग्रह की हर पीड़ा से मुक्ति मिलती है. गुरुवार का व्रत पूरे श्रद्धाभाव से करने पर व्यक्ति को गुरु ग्रह का दोष खत्म हो जाता है तथा गुरु कृपा प्राप्त होती है. इन दिन व्रत करने से व्यक्ति को सारे सुखों की प्राप्ति होती है. व्रत करने वाले जातक को यह ध्यान रखना चाहिए कि इस दिन बाल न कटाएं और ना ही दाढ़ी बनवाएं.

धर्म शास्त्रों में बृहस्पति देव के दयालु स्वभाव के बारे में कई उल्लेख मिलते हैं। कहा जाता है कि गुरुवार का दिन बृहस्पति देव को समर्पित है और उस दिन श्रद्धालु बहुत ही श्रद्धा भाव से उनकी पूजा करते हैं। बृहस्पतिवार अविवाहित कन्याओं के लिए बहुत अनुकूल माना जाता है, इस दिन वह बृहस्पति देव की पूजा करके मनचाहा वर पा सकती हैं। यह भी कहा जाता है कि जो इस दिन भगवान विष्णु को प्रसन्न करने में सफल हो जाते हैं उनका वैवाहिक जीवन बहुत सुखमय होता है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार जो इंसान साल में 16 बार बृहस्पतिवार के दिन व्रत करता है उसे मनवांछित फल मिलता है। 

अगर आप भी बृहस्पतिवार के दिन व्रत करते हैं तो यह व्रत कथा जरूर सुनिए।

एक समय की बात है, एक गांव में एक ब्राह्मण अपनी धर्मपत्नी के साथ रहता था। उस दंपत्ति की एक भी संतान नहीं थी, ब्राह्मण और उसकी पत्नी इस बात से बहुत दुखी रहते थे। हर रोज उस ब्राह्मण की पत्नी स्नान के बाद भगवान की पूजा श्रद्धा भाव से करती थी। उसे देख कर ब्राह्मण भी अपने मन में भगवान का नाम लेता रहता था। लेकिन इससे उन दोनों को कोई लाभ नहीं हुआ, तभी एक दिन अचानक उन्हें खुशखबरी मिली। ब्राह्मण के घर लक्ष्मी के रूप में एक बेटी ने जन्म लिया था।

जब उसकी बेटी बड़ी हुई तो वह भी भगवान विष्णु की भक्ति में लीन रहने लगी। वह जब भी विद्यालय जाती थी तो मुट्ठी भर जौ अपने साथ ले जाती थी। विद्यालय जाते समय वह जौ के दाने को डालती जाती थी और जब वह जौ बड़े हो कर सोने में तब्दील हो जाते थे तो उन्हें काटकर अपने घर ले आती थी। एक दिन उस ब्राह्मण ने अपनी बेटी को ऐसा करते हुए देख लिया। ब्राह्मण ने अपनी बेटी को कहा कि यह जौ अब सोने के जौ नहीं बल्कि सोने के सूप में बदल जाने चाहिए।

अगले गुरुवार की सुबह वह ब्राह्मण की बेटी जल्दी उठकर बृहस्पति देव की पूजा करने लगी, उसने बृहस्पति देव से प्रार्थना किया कि अब से जो वह जौ उगाएगी वह सोने के सूप में बदल जाएं। बृहस्पति देव ब्राह्मण की बेटी से प्रसन्न हो गए और उन्होंने उसकी मनोकामना पूरी की। जब वह विद्यालय से वापस आई तो उसने देखा कि वह जौ अब सोने के सूप बन गए हैं। उस दिन से वह ब्राह्मण और उसका पूरा परिवार भगवान बृहस्पति देव की पूजा करने लगा।

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